जिले में टीबी एवं कुष्ठ खोज अभियान प्रारंभ जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर किया रवाना

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उत्तर बस्तर कांकेर 04 जनवरी 2023 :- जिले में 25 जनवरी तक चलने वाले टीबी एवं कुष्ठ खोज अभियान आज से प्रारंभ किया गया। इस अभियान का उद्देश्य जिला को टीबी एवं कुष्ठ रोग से मुक्त करना है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अविनाश  खरे व डॉ. सुनील कुमार सोनी डी.एल.ओ. द्वारा अभियान का प्रचार-प्रसार के लिए टीबी एवं कुष्ठ मुक्त रथ को हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया गया। इस अभियान के सफल क्रियान्वयन के लिए जन-जागरूकता हेतु स्कूलों, कॉलेजों में रैली, नगर पालिका, जनपद पंचायत में जन प्रतिनिधियों द्वारा ग्राम पंचायतों में अभियान की चर्चा व संदेष आम जनता को देंगे। सर्वे पूर्व ग्राम, मोहल्ला, वार्ड में कोटवार के द्वारा मुनादी की जायेगी तथा होर्डिंग, पोस्टर, पॉम्पलेट तथा टीबी एवं कुष्ठ मुक्ति रथ से जिले के सभी विकास खंडों में मॉईकिंग के द्वारा प्रचार-प्रसार किया जा रहा है।
कलेक्टर डॉ. प्रियंका शुक्ला द्वारा स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों को इस कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन के लिए आवश्यक दिशा निर्देश दिये हैं। उन्होंने जिले के नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि हम सबकी जिम्मेदारी व कर्तव्य है कि अभियान के दौरान सर्वे कर्ता मितानिन जब आपके घर जॉच के लिए आये तो परिवार के सभी सदस्यों की जांच अवश्य करायें। लक्षण के आधार पर मितानिन द्वारा टीबी एवं कुष्ठ रोग के संभावित मरीजों की सूची तैयार कर नजदीकी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में चिकित्सक से सत्यापन व उपचार के लिए भेजेंगे तथा सत्यापन उपरांत निशुल्क जांच व उपचार किया जायेगा। कुष्ठ रोग कोई पाप या अभिशाप का प्रतिफल नहीं है, यह एक जीवाणु से होने वाला रोग है, जिसके लिए रामबाण औषधि एम.डी.टी. है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अविनाष खरे ने बताया कि  रोगी द्वारा रोग के प्रारंभिक लक्षण की अज्ञानता के कारण विलम्ब से पकड़ में आने से रोगी के हॉथ, पैर व ऑख में विकृति आती है। प्रारंभिक अवस्था में शीघ्र जांच व उपचार से कुष्ठ रोग बिल्कुल ठीक हो जाता है एवं विकृति नहीं आती। इसी प्रकार टीबी का शर्तिया इलाज डॉट्स है।
इस अभियान के तहत जिले में मितानिन, वॉलेन्टियर सहित सर्वेकर्ताओं की ड्यूटी लगाई गई है, जिनकी संख्या 3359 है। मितानिन के सहयोग व मॉनिटरिंग के लिए ग्राउंड लेबल पर आर.एच.ओ (पुरूष), मितानिन प्रशिक्षण, स्वास्थ्य पर्यवेक्षक को अभियान का सुपरवाईजर बनाया गया है, जिनकी संख्या 494 है। इसके अतिरिक्त अभियान की मॉनिटरिंग विकासखण्ड स्तर, जिला स्तर, राज्य स्तर से भी किया जावेगा।

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