छत्तीसगढ़ में पेपरलेस रजिस्ट्री की नई शुरुआत: माय डीड के माध्यम से होगी जमीनों की रजिस्ट्री

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Today36garh

 रायपुर, 21 जुलाई 2025:

 

 

छत्तीसगढ़ में जमीनों की रजिस्ट्री प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी, तेज, और डिजिटल बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। महानिरीक्षक पंजीयन पुष्पेंद्र मीणा ने बीते 10 जुलाई को राज्य के सभी पंजीयन कार्यालयों को पेपरलेस रजिस्ट्री प्रक्रिया लागू करने के लिए आवश्यक तैयारियों का निर्देश जारी किया। आज से इसी माय डीड को सभी पंजीयन कार्यालयों के लिए अनिवार्य कर दिया गया है। अब पूरे प्रदेश में इसी माय एप के माध्यम से पंजीयन की प्रक्रिया पूरे प्रदेश में की जाएगी।

अब प्रदेश में जमीनों की रजिस्ट्री ‘माय डीड’ डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से की जाएगी, जिससे कागजी कार्यवाही में कमी आएगी और प्रक्रिया में तेजी आएगी।’माय डीड’ एक डिजिटल रजिस्ट्री सिस्टम है, जो छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा शुरू किया गया है। इस पहल का उद्देश्य रजिस्ट्री प्रक्रिया को सरल, सुरक्षित और समयबचत बनाना है।

 

 

इस प्लेटफॉर्म के जरिए संपत्ति के दस्तावेजों का डिजिटल सत्यापन, भुगतान, और रजिस्ट्री प्रक्रिया ऑनलाइन पूरी होगी। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि कागजी दस्तावेजों के गुम होने या धोखाधड़ी की संभावना भी कम होगी।

महानिरीक्षक पंजीयन पुष्पेंद्र मीणा ने बताया कि इस नई व्यवस्था से प्रतिवर्ष 40 से 50 लाख लोगों को लाभ होने की उम्मीद है। उन्होंने सभी पंजीयन कार्यालयों को निर्देश दिए हैं कि वे इस डिजिटल व्यवस्था को लागू करने के लिए तकनीकी और प्रशासनिक तैयारियां पूरी करें। इसके तहत कर्मचारियों को प्रशिक्षण, तकनीकी उपकरणों की व्यवस्था, और जनता के लिए जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे।

 

 

क्या है ‘माय डीड’ की खासियत?

डिजिटल प्रक्रिया: रजिस्ट्री के लिए कागजी दस्तावेजों की जरूरत नहीं होगी। सभी दस्तावेज ऑनलाइन अपलोड और सत्यापित किए जाएंगे।
पारदर्शिता: डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए सभी लेनदेन और दस्तावेजों की जानकारी सुरक्षित और पारदर्शी होगी।
समय की बचत: पारंपरिक प्रक्रिया की तुलना में रजिस्ट्री का समय काफी कम होगा।
सुरक्षा: डिजिटल सत्यापन से धोखाधड़ी और जालसाजी की संभावना कम होगी।

जनता को होगा लाभ

 

 

छत्तीसगढ़ सरकार का यह कदम डिजिटल इंडिया पहल के अनुरूप है, जिससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के लोगों को लाभ होगा। विशेष रूप से, दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को अब बार-बार कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। ‘माय डीड’ के माध्यम से वे घर बैठे रजिस्ट्री प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे।हाल ही में, छत्तीसगढ़ सरकार ने इस प्रक्रिया को और प्रभावी बनाने के लिए कई सुधार लागू किए हैं, जिसे विभिन्न समाचार स्रोतों ने भी उजागर किया है। इस कदम को विशेषज्ञों ने संपत्ति प्रबंधन में क्रांतिकारी बदलाव बताया है, जो छत्तीसगढ़ को डिजिटल शासन की दिशा में अग्रणी बनाएगा।

आगे की राह
पंजीयन विभाग ने सभी जिला कार्यालयों को निर्देश दिया है कि वे ‘माय डीड’ प्लेटफॉर्म के उपयोग के लिए जनता को जागरूक करें और तकनीकी बुनियादी ढांचे को मजबूत करें। साथ ही, यह सुनिश्चित करने के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट की उपलब्धता और तकनीकी जानकारी की कमी इस प्रक्रिया में बाधा न बने।इस पहल से छत्तीसगढ़ में संपत्ति रजिस्ट्री की प्रक्रिया न केवल आधुनिक होगी, बल्कि यह नागरिकों के लिए अधिक सुविधाजनक और विश्वसनीय भी बनेगी। सरकार का लक्ष्य है कि इस डिजिटल प्रणाली के जरिए राज्य में संपत्ति लेनदेन को और अधिक पारदर्शी और कुशल बनाया जाए।

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