जगद्गुरु_शंकराचार्य_परम_पूज्य_स्वामी_स्वरूपानंद_सरस्वती_जी_महाराज आज इस धरा-धाम को छोड़ कर हुए ब्रह्मलीन

रायपुर (एजेंसी) :आज सनातन धर्म का धर्मवाहक परम तपस्वी अनंत श्री विभूषित जगद्गुरु_शंकराचार्य_परम_पूज्य_स्वामी_स्वरूपानंद_सरस्वती_जी_महाराज का इस धरा-धाम को छोड़ कर के ब्रह्मलीन हो जाना सनातन धर्म की बहुत बड़ी क्षति है । आप सनातन धर्म के ध्वजवाहक थे ,धर्म वाहक थे, आपकी छत्रछाया में सनातन संस्कृति पुष्पित- पल्लवित हो रही था। परंतु सन्यासी का निर्वाण एक पर्व होता है ,और उसे पर्व की तरह ही मनाया जाता है। 100 वर्षों तक इस सनातन पवित्र भारत की भूमि को शास्त्र सम्मत धर्म संचालित किया । आप समय-समय पर अनेक प्रकार से सनातन धर्म के लोगों का मार्गदर्शन प्रशस्त करते रहते थे। आपकी आभा-प्रभा के अंदर सनातन धर्म के लोग अपने आपको गौरवान्वित मानते थे । बहुत से राजनीतिक लोग आपको कुछ भी कहते हो परंतु मै वे हृदय से सभी आपको प्रणाम निवेदित करते थे आप के प्रति मन में सब के श्रद्धा थी आदर था क्योंकि वह सब जानते थे कि हम राजनीति के विषय में जो मर्जी कुछ कहें परंतु पूज्य महाराज जी की आभा- प्रभा के सामने सबका तेज फीका पड़ता है । और महाराज जी की वाणी महाराज जी का जीवनचर्या यह एक आदर्श जीवनचर्या है जो आदि ऋषियों मुनियों के जीवन जैसा होती हैं । पूज्य श्री का धरा से चले जाना वास्तव में सनातन धर्म अनुयाइयों के लिए वास्तव में अपूर्णीय क्षति है । सनातन धर्म का आज दिव्य सूर्य अस्त की हुआ।

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