आस्था का महापर्व छठ : आज से शुरुआत , खरना कल , अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देंगे व्रती

Today36garh

रायपुर/बिलासपुर/रायगढ़/सरगुजा : लोक आस्था के महापर्व की शुरुआत आज से होगी । व्रति नहाय खाय के साथ चार दिनों के इस पर्व को शुरू करेंगे । मंगलवार को व्रत के दूसरे दिन रसियाव रोटी का प्रसाद ग्रहण कर निर्जला उपवास शुरू करेंगे और अगले दिन अस्तांचल होते भगवान भाष्कर को अर्ध्य देंगे।
सोमवार को व्रति नहाय-खाय के दौरान चावल, चने की दाल और लौकी (घीया) की सब्जी खा कर व्रत को शुरू करने के साथ दूसरे दिन खरना की तैयारी भी शुरू करेंगे।

भगवान भाष्कर के चार दर7नों के इस अनुष्ठान को लेकर रायपुर, बिलासपुर,सरगुजा और रायगढ़ जिले के कई इलाके गुलजार हो गए है। स्वच्छता के माहौल में पूर्वांचल बाहुल्य क्षेत्र पूरी तरह से छठमय हो गया है। अनाधिकृत कॉलोनी ही नहीं अपार्टमेंट, फ्लैट्स में रहने वाले पूर्वाचलियों के घरों में छठी मइया के गीतों से भक्ति की बयार बहने लगी है। वैसे पर्व की शुरुआत भले ही आज हो रही है लेकिन दिल्ली में इस मामले पर कई दिन पहले सियासत चल रही है।

कोविड की वजह से घरों के छत पर ही बनेगा घाट
कोविड की वजह से इस बार भी घरों के छत, बाल्कनी, पार्क में ही नदी का घाट बनेगा। दरअसल यह पर्व बहते हुए पानी के श्रोत वाले घाट पर करने की परंपरा है। लेकिन इस बार भी यमुना घाट पर पर्व मनाने की इजाजत नहीं मिलने की वजह से घरों के छत पर ही इस पर्व को मनाने की तैयारी हे। इसके साथ ही पार्क व छोटे-छोटे सीमेंटेड तालाब में पानी का जमाव करके भी अपार्टमेंट, सोसायटी, आवासीय परिसर में भी बनाए गए है। व्रती बुधवार की शाम को पहुंच कर पानी में सूप लेकर खड़ी होंगी और अस्तांचल सूर्य को अर्घ्य देंगे और बृहस्पतिवार को उगते हुए सूर्य को अघ्र्य देंगे। बआहूत से आवासीय परिसर में लंबे समय से छठ पूजा का आयोजन किया जा रहा है। यहां एक पोखर व्रतियों के लिए बनाया गया है। कृत्रिम तालाब के साथ वेदियां (सुसोप्ता) भी बनाया गया है।

घरों के छत व बाल्कनी में भी पूजा-अर्चना करते है
शहर के कई इलाकों में लोग छठ घाट पर नहीं पहुंचने की स्थिति में घरों की छतों पर हौज बनाकर उनमें पानी भरकर छोटे-छोटे समूहों में छठ पूजा करने की तैयारी में है। कई इलाकों में छतों को भी केला के पत्ते से खासतौर पर सजाया जा रहा है। प्लास्टिक व रबर के बड़े हौजनुमा ट्यूब भी इस मकसद से बाजार में खूब बिक रहे है। अनधिकृत कॉलोनी में रहने वाले व कई अपार्टमेंट में रहने वाले लोगों को छत की उपलब्धता नहीं होने पर गलियों व घरों के बाहर ही पूजा-अर्चना करेंगे।

बाजारों में रौनक
इस पर्व में छठ व्रती पूरी पवित्रता का ख्याल रखते हैं। नहाय खाय के बाद पूजा सामग्री की खरीदारी भी शुरू होती है। आस्था के महापर्व को लेकर घरों से लेकर बाजार तक रौनक बढ़ने लगी है। भगवान भास्कर को अर्घ्य अर्पित करने के लिए दिल्ली केपूर्वांचल बाहुल्य इलाके में बांस से बने सूप और दउरा की दुकानों पर खरीदारी शुरू भी हो गई है। आजादपुर में बांस के बने सूप व दउरा ट्रकों में भरकर पहुंच रहे है। इस पर्व में इस्तेमाल होने वाले छिलका सहित नारियल, गागल और गन्ना विशेष रूप से मंगाया जा रहा है। वहीं कुम्हार इस पूजा में इस्तेमाल होने वाले मिट्टी के हाथी और मिट्टी के कोशी तैयार करने में जुटे है। भजनपुरा, वजीराबाद पुश्ता, उत्तम नगर, पालम समेत कई जगह बाजार भी लग गया है।

पुरुष भी करते हैं इस व्रत को
पंडित कौशल किशोर पांडेय कहते है कि छठ पर्व एक कठिन तपस्या की तरह है। इस पर्व को महिलाएं तो करती ही है साथ ही कई पुरुष भी इस व्रत रखते हैं। चार दिनों के इस व्रत में व्रती को लगातार उपवास करना होता है। भोजन के साथ ही सुखद शैय्या का भी त्याग करना होता है। पर्व के लिए बनाए गए कमरे में व्रती फर्श पर एक कंबल या चादर बिछा कर सोती है। महिलाएं साड़ी और पुरुष धोती पहनकर छठ व्रत करते है। छठ पर्व को तब तक करना होता है, जब तक कि अगली पीढ़ी की किसी विवाहित महिला को नहीं सौंपा जाता है। नदी में पाबंदी भले ही कर दी गई हो, लेकिन हर हाल में इस व्रत को पानी में खड़े होकर व्रति करते है।

पुत्र रत्न की प्राप्ति व पति के स्वास्थ्य के लिए पूजा
मुखर्जी नगर स्थित शक्ति मंदिर के पंडित राधेश पांडेय कहते है कि मान्यता के अनुसार छठ पर्व पर व्रत करने वाली महिलाओं को पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है। पुत्र की चाहत रखने वाली और पुत्र की कुशलता के लिए सामान्य तौर पर महिलाएं यह व्रत रखती हैं। पति और बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए महिलाएं इस पर्व को व्रत रखती हैं।

छठ पर बजने वाले मुख्य लोक गीत
उग हे सूरज देव…
घरे घरे होता माई के बरतिया…
जल्दी उग आज आदित गोसाईं…
कांच ही बांस के बहंगिया…
छठी मईया सुन ली पुकार…
पहिले पहिल हम कइनी, छठी मइया व्रत तोहार…
केरवा जे फरेला घवद से…

 

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