रक्षाबंधन:इस बार भद्रा की रहेगी काली छाया इसलिये जानिये राखी बांधने के श्रेष्ठ मुहूर्त

Today36garh

रायपुर:इस बार रक्षाबंधन का पर्व कई विशेष संयोग लेकर आ रहा है। सामान्यतः रक्षापर्व श्रवण नक्षत्र में मनाया जाता है, लेकिन इस बार 22 अगस्त को यह पर्व धनिष्ठा में मनेगा। शोभन, अमृत व गजकेसरी महायोग इस पर्व की शोभा बढ़ाएंगे। पूर्णिमा शाम 5.31 बजे तक रहेगी। वहीं शोभन योग सुबह 10.38 बजे तक रहेगा। अमृत योग सुबह 5.45 से शाम 5.32 तक रहेगा। रक्षाबंधन सुबह 6.16 बजे के बाद पूरे दिन शुभ मुहूर्त में कर सकते हैं। मकर कुंभ राशि का चंद्रमा सिंह राशि का सूर्य व कुंभ राशि के बृहस्पति में बहनें अपने भाई की कलाई पर आयु व आरोग्य की कामना से रक्षा सूत्र बांधेगी।

भद्रा प्रात: 6.16 बजे तक ही रहेगी

सामान्यतः भद्रा काल में रक्षा बंधन वर्जित है।इस बार भद्रा प्रातः 6.15 मिनट तक है। इसके बाद पूरे दिनभर शुभ मुहूर्त में रक्षापर्व कुल परंपरा अनुसार मनाया जाना शुभ है। भद्रा में रक्षाबंधन से राजा का अनिष्ट होता है। सावन मास की पूर्णिमा को भद्रा रहित शुभ मुहूर्त में रक्षाबंधन का पर्व आयु और आरोग्य की वृद्धि के लिए मनाया जाता है।

पूर्ण चंद्र पूर्णिमा को ही रहता है और पूर्णिमा तिथि के देवता चंद्रमा है, अतः रक्षा बंधन के लिए पूर्णिमा तिथि उचित है।

रक्षा सूत्र तैयार करने की विधि : श्रावण शुक्ल पूर्णिमा को विधि विधान से रक्षासूत्र तैयार कर स्वस्ति वाचन के साथ इंद्राणी ने इंद्र को युद्ध में विजयी होने की भावना से स्वस्ति महामंत्र से रक्षा सूत्र बांधा था। तब से आज तक यह परंपरा रक्षाबंधन के नाम से चली आ रही है।

इस मंत्र का करें उच्चारण

एक चौकी पर कलश स्थापित कर उस पर रक्षासूत्र की सविधि गंध, अक्षत पुष्प आदि से पूजन कर येन बद्धो बली राजा दानवेंदोमहा बलः तेन त्वामनु बध्नामि रक्षे मा चल मा चल।।’ इस मंत्र से दाहिने हाथ में रक्षा सूत्र बांधने से आयु और आरोग्य की वृद्धि होती है।

ऐसे बनाएं रक्षा सूत्र

सावन पूर्णिमा को स्नान आदि से शुभ मुहूर्त में कुल परंपरा अनुसार श्री गणेशजी व कुल देवता का स्मरण कर रक्षा सूत्र बनाने की परंपरा है। ऊनी, सूती या रेशमी पीला कपड़ा लेकर उसमें सरसो दन, अक्षत, दूर्वा रख बंधन तैयार किया जाता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here