सुश्री अनुसिया उईके हो सकती हैं ,आदिवासी वर्ग से भारत की पहली राष्ट्रपति !!

“विश्व आदिवासी दिवस पर विशेष”

Today36garh

रायपुर ब्यूरो: भारतवर्ष में वनवासियों अर्थात आदिवासियों की बहुत बड़ी आबादी होने के बाद भी अभी तक किसी भी आदिवासी को राष्ट्रपति बनने का मौका नहीं मिला है ।आजाद भारत में अब तक  कुल 14 राष्ट्रपति हुए हैं । इनमें से दो दलित राष्ट्रपति हुए हैं और एक मुस्लिम । 97 में केआर नारायणन पहले दलित राष्ट्रपति बने थे । उनके बाद 2017 में मोदी सरकार ने रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति के पद पर बिठाया गया । मौजूदा राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद का कार्यकाल  पूरा होने में भी अब एक साल से भी कम का समय बचा है । ऐसे में अगले वर्ष मार्च से राष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया प्रारंभ हो जाएगी और जून में चुनाव होगा तत्पश्चात 25 जुलाई को चुने गए नए राष्ट्रपति का शपथ होगा ।

अब चूकि अगले साल राष्ट्रपति का चुनाव है ,ऐसे में अब अगले राष्ट्रपति के नामों की अटकलें शुरू हो गई हैं । इनमें से एक प्रमुख नाम वर्तमान में छत्तीसगढ़ की राज्यपाल सुश्री अनसुईया उइके का भी शामिल है ।

इस संभावना की क्या है वजह

सुश्री अनुसईया उइके आदिवासी होने के साथ ही महिला भी हैं । इस तरह उन्हें देश के इस शीर्ष पद पर बिठाने से देश में दो वर्गों को साधा जा सकता है, पहला आदिवासी और दूसरा  महिला वर्ग को।हिंदुस्तान में अभी तक एक महिला राष्ट्रपति हुई हैं वो हैं प्रतिभा पाटिल ।

तो हो सकती हैं देश की पहली आदिवासी राष्ट्रपति..

भाजपा के पास आदिवासी वर्ग से राष्ट्रपति के पद पर बिठाने के लिए वर्तमान में सुुुश्री अनसुइया उइके से बड़ा कोई चेहरा नहीं है  । द्रौपदी मुर्मू राज्यपाल पद से हट चुकी हैं और अब अपने गृह राज्य उड़ीसा में हैं । उनके अलावा आदिवासी समुदाय में किसी अन्य महिला का चर्चित नाम या चेहरा नहीं है । सुश्री अनसुईया उइके को सरकार में रहने का अनुभव भी है । मध्यप्रदेश में मंत्री रह चुकी हैं ।छत्तीसगढ़ में राज्यपाल के पद पर भी दो साल हो गया है । अगले साल तक तीन साल हो जाएगा । अगर समय रहते सब कुछ ठीक रहा तो सुश्री अनसुईया उइके देश के शीर्ष कुर्सी पर प्रथम आदिवासी राष्ट्रपति के रुप मे विराजमान हो सकती हैं।

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