खुदरा के बाद थोक महंगाई भी घटी, जून में रही 12.07 फीसदी

नई दिल्ली : महंगाई के मोर्चे पर आम जनता के लिए थोड़ी राहत की खबर आई है। थोक मूल्य आधारित मुद्रास्फीति (थोक महंगाई दर) जून में मामूली गिरावट के साथ 12.07 फीसदी पर आ गई। पिछले महीने कच्चे तेल और खाद्य पदार्थों की कीमतों में कुछ नरमी देखी गई, जिससे थोक महंगाई दर में गिरावट दर्ज की गयी। हालांकि जून लगातार तीसरा ऐसा महीना रहा, जिसमें थोक महंगाई दर दोहरे अंकों में रही। इसकी तुलना में पिछले साल की समान अवधि में थोक महंगाई दर (-)1.81 फीसदी रही थी। बता दें कि जून में खुदरा महंगाई भी कम हुई।

रिकॉर्ड स्तर पर थी थोक महंगाई

मई में थोक महंगाई 12.94 फीसदी के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गयी थी। इसलिए इसका जून में कम होना अच्छी खबर है। इसके पहले लगातार पांच महीनों से थोक महंगाई में बढ़ोतरी देखी जा रही थी। विनिर्मित उत्पादों के दाम बढ़ने के बावजूद खाद्य पदार्थों और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आई, जिससे थोक महंगाई कम हुई। जून में ईंधन और बिजली मुद्रास्फीति घटकर 32.83 प्रतिशत रह गई, जो मई में 37. 61 प्रतिशत थी। खाद्य पदार्थों की महंगाई दर भी जून में घट कर 3.09 प्रतिशत रह गई, जो मई में 4 प्रतिशत थी, जबकि प्याज की कीमतों में तेजी आई। विनिर्मित उत्पादों की महंगाई दर जून में 10.88 प्रतिशत रही, जो उससे पिछले महीने 10.83 प्रतिशत थी।

कितनी रही खुदरा महंगाई

उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) द्वारा मापी जानी वाली देश की खुदरा मुद्रास्फीति जून में मामूली गिरावट के साथ 6.26 फीसदी पर आ गई। इससे पहले मई में यह 6.3 फीसदी रही थी। इस बात का खुलासा सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की तरफ से जारी किए गए आंकड़ों में हुआ है। यह लगातार दूसरी बार है जब सीपीआई डेटा भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के 6 फीसदी के ऊपरी मार्जिन से अधिक रहा है। इससे पहले लगातार पांच महीनों तक सीपीआई 6 फीसदी के नीचे रहा था। जून में ईंधन की बढ़ती कीमतों और खाद्य महंगाई के कारण खुदरा महंगाई दर काफी अधिक रही। खाद्य मुद्रास्फीति मई में 5.01 प्रतिशत रही, जो जून में बढ़ कर 5.15 प्रतिशत हो गई।

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